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शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

3:03 pm

होली का त्यौहार भाईचारे के साथ मनाएं

होली का त्यौहार भाईचारे के साथ मनाएं


आप आदरणीय/आदरणीया से अनुरोध है कि होली का त्यौहार भाईचारे के साथ मनाएं। होली हर्ष और उमंग के साथ जीवन को खुशियों से रंगने संकल्प का त्यौहार है, इसलिए होली के दौरान कच्चे रंग का इस्तेमाल करें तथा पक्के रंगों का इस्तेमाल करके पानी बर्बाद न करें, क्यों कि जल ही जीवन है। होली को पूरे होंस-हवास में मनाएं, नशीले पदार्थों का सेवन करके त्यौहार को व्यर्थ न बनाएं।

होलीका दहन के नाम पर हरे भरे पेड को काटना मानव जीवन को संकट में डालने के समान है इसलिए वृक्षों को न काटें, इसके स्थान पर कचरे एवं अपने घर के खराब पडे अथवा घुन लगे फर्नीचर को जलाना बेहतर होगा।

ज्ञातव्य हो कि, किसी भी व्यक्ति से जबरन चंदा वसूली करना लूट है, तथा किसी के घर से लकडी/कंडे, टेबल/कुर्सी को होली के नाम पर जबरन ले जाना चोरी एवं डकैती की श्रेणी में आता है। 

हाल ही में छात्रों का वार्षिक परीक्षा होना है इसलिए ध्वनि प्रदुषण, शोर-गुल करके बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड नही करें। 

दोस्तों, 2 मार्च को होली का त्यौहार है और इसी दिन जूम्मे की नमाज अदा की जाएगी इसलिए त्यौहार को हर्षाेल्लास एवं सद्भाव के साथ मनाने में सबकी सहभागिता आवश्यक है। हिन्दू भाईयों से अपील है कि मुस्लिम बंधुओं के अनुमति के बिना उन्हें जबरन रंग नही लगाएं।

शराब पीकर अथवा मुखौटा पहनकर वाहन चलाना, तीन सवारी, ओवर स्पीड, बिना हेलमेट और नाबालिक बच्चों का वाहन चलाना मृत्यु का कारक है, इससे परहेज करें। 

नशीले वस्तुओं की बिक्री करने वालों, शराब पीकर शांति भंग करने वालों, जबरदस्ती चंदा वसुलने वालों, लकडी चोरी करने वालों और हरे भरे पेड काटने वालों के बारे में पुलिस को 100 नंबर में काॅल करके जरूर बताएं।

मेरा आपसे एक अनुरोध यह भी है कि अपने खुसी के लिए मांस-मदिरा का सेवन नही करें, क्योंकि मांस का सेवन करने का मतलब जीव हत्या को बढावा देना है। दोस्तों आप सबको तो ज्ञात है कि हम सभी जीव एक ही ईश्वर के संतान हैं अर्थात् सभी जीव भाई के समान हैं।


Huleshwar Joshi
Sector 27, Naya Raipur
Chhattisgarh

मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

4:26 am

पुलिस वेलफेयर सिक्योरिटी गार्ड प्रशिक्षण केंद्र दुर्ग का शुभारंभ

पुलिस वेलफेयर सिक्योरिटी गार्ड प्रशिक्षण केंद्र दुर्ग का शुभारंभ 


दुर्ग आईजी श्री जीपी सिंह द्वारा मुख्यमंत्री कौशल विकास योजनान्तर्गत रक्षित केंद्र दुर्ग में पुलिस वेलफेयर सिक्योरिटी गार्ड प्रशिक्षण केंद्र का आज दिनांक 19/02/2018 को शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर दुर्ग के पुलिस अधीक्षक डॉ संजीव शुक्ला सहित जिले के अन्य राजपत्रित अधिकारी उपस्थित रहे।


ज्ञातव्य हो इस प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से लगभग 45 महिलाओं को वर्तमान मे  सिक्योरिटी गार्ड का प्रशिक्षण दिया जावेगा।




रविवार, 18 फ़रवरी 2018

11:30 am

पूजा पचिस्ठा के नवा तरीका .....

पूजा पचिस्ठा के नवा तरीका .....

हे भगवान मोर रक्षा करबे, जिनगी ह भारी आर्थिक संकट ले गुजरत हे ............।
अरे तय कहां चल दे ओ, दे तो माचिस ल लइकामन कहां रख देहे।
मोर गोड म कभु काटा झन गड़य भले दूसर के गोड म खीला गड जावय, परोसी ह बड़े आदमी बनत हे ओला घटा के कुछ मोला देदे।
अरे माचिस मांगे हावव कहां मर गे! ओ ...........

एले काकर फोन आगे, पूजा घलो म बाधा!लातो मोर मोबाइल ल काखर फोन आगे, वो सारा बेटा xxxx होहि, 2महीना होंगे ₹5000 वापिस नई करे है। अउ फेर ₹25000 मंगत हे, xxxx होहि त कहि देबे मय मोबाइल ल भूल गे हावव।
हे भगवान मोर परोसी के लइका मन भारी हो हल्ला करथें, थोरकुन लइका मन ल बुध्दि देहव।
पूजा समाप्त .... बिना अगरबत्ती जलाए।

11:20 am

आओ अंगदान करें .... मृतशरीर को जलाना/दफनाया जाना केवल रूढ़िवादी परम्परा है

आओ अंगदान करें .... मृतशरीर को जलाना/दफनाया जाना केवल रूढ़िवादी परम्परा है

एतद्द्वारा मैं (हुलेश्वर जोशी) अपने परिजनों, रिस्तेदारों, और मित्रों से आग्रह करता हूँ, कि भविष्य में जब मेरी मृत्यु हो तो कृपया इस संबंध में सर्वप्रथम अविलम्ब चिकित्सा विभाग को सूचित करने की कृपा करें, ताकि मेरा मृत्यु सार्थक हो सके।


अंगदान सबसे बड़ा जीवन दान है कई लोगों को जीवन दे सकती है, इसलिए आपसे भी अनुरोध है कि आज ही National Organs and Tissues Transplant Organization, Ministry of Health and Family Welfare, Govt of India के वेबसाइट http://notto.nic.in/ में जाकर मृत्यु पश्चात अंगदान का संकल्प लें।

मैंने अपने मृतशरीर को व्यर्थ जलने /दफन होने से बचाया है, यह रूढ़िवादी परंपरा को खत्म करने का मेरा एक छोटा सा प्रयास है। आइये सब मिलकर इस रूढ़िवादी परंपरा को खत्म करें।

ज्ञातव्य हो, कि मैंने आज 24/01/2018 को मृत्यु उपरांत अपने शरीर के समस्त Organs एवम Tissues को दान कर दिया है।

मैंने अंगदान किया, इसे शेयर करना अच्छी बात है। यह बहुत अच्छा होता कि आप स्वयं अंगदान कर लें।


मेरे अंगदान की सूचना देते हुए ज्ञात हुआ कि मुझसे पहले लगभग देशभर के 1लाख से अधिक लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है, जिसमे मेरे परिचित/ मित्र भी शामिल हैं मगर मुझे पहले ज्ञात नही हुआ था।


Huleshwar Joshi
Duty : IGP Office Durg Range Durg
Res : Sector 27, Naya Raipur, Chhattisgarh
Mobile 94060-03006/94791-90018




मृतशरीर को जलाना/दफनाया जाना केवल रूढ़िवादी परम्परा है, आओ अंगदान करें। 5 से 10 लोगों को जीवन / बेहतर जीवन प्रदान करें। यदि आपमें वास्तविक #मानवसेवा की भावना जागृत हो जाए और #मानवधर्म को स्वीकारने लगें, तो वर्तमान परिदृश्य में आपको ज्ञात हो जाएगा कि पूर्ण #मृतशरीर का #दाहसंस्कारअथवा मृतशरीर को #दफ़नाना केवल #रूढ़िवादी परंपरा हो चुकी है। फिर आप अवश्य ही, मृत्यु पश्चात #अंगदान का संकल्प लेंगे।

 




किसी ने कहा "अंगदान कर लिए अच्छी बात, अब इसका प्रचार करके महान बनना चाहते हो?"

मैंने कहा, रूढ़िवादी परंपरा को समाप्त कर रहा हूँ वैसे मेरे आसपास के लोगों को ज्ञात होना चाहिए ताकि मेरे मृत्यु की सूचना परिवार से पहले NOTTO (चिकित्सा विभाग) को दे सकें।

शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

12:42 pm

गुरु अमरदास जयंती मनाने के संबंध में सुझाव

गुरघासीदास सेवा समिति, सतनामी समाज भोपाल द्वारा दिनांक ०९ जुलाई २०१७ को गुरुघासीदास गुरुद्वारा, मिलिंद नगर भोपाल में "गुरू अमरदास" जयंती का आयोजन किया गया है। इस आयोजन हेतु समिति के अध्यक्ष श्री किशन बंजारे सतनामी द्वारा संत समाज से आग्रह किया गया है कि संत समाज इस आयोजन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें। 

सतनामी संतों ज्ञातव्य हो कि गुरु अमरदास की जयंती प्रत्येक वर्ष आषाढ़ गुरुपूर्णिमा के दिन ही मनाया जाता है। इस संबंध में कुछ विशेष सुझाव मैं संत समाज से share करना चाहता हूँ :-
1 समाज द्वारा आयोजित जयंती कार्यक्रम में क्रमशः पदयात्रा, चौकपूजा, ध्वजारोहण, पंथी नृत्य, भंडारा व प्रसाद वितरण व रात्रिकाल में सतनाम भजन/सतनाम प्रवचन अथवा गुरु बाबा के जीवन पर आधारित *लीला ही कराया जावे। किसी भी प्रकार से नाचा - गम्मत या सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से सतनामी संस्कृति को भ्रष्ट न किया जावे न ही अनैतिक नृत्य व गान कराया जावे। ऐसा करना पूर्णतः निंदनीय व गुरु बाबा का अपमान है।*
2 समय समय पर साहू, यादव, मरार व गोंड़ समाज के मित्रों द्वारा आपत्ति दर्ज कराया गया है कि सतनामी संतों द्वारा बाबा जी पर एकाधिकार जमाते हुए हमें बाबाजी के जयंती में आमंत्रित नही किया जाता है न जयंती कराने के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में बुलाया जाता है और न तो जयंती कार्यक्रम कराने पर योगदान (चंदा, इत्यादि) लिया जाता। बाबा जी तो लोककल्याणकारी हैं उनकी पूजा समस्त मानव समाज के द्वारा की जाती है, इसलिए कुछ लोग बिना पूछे ही जयंती कार्यक्रम में भाग लेकर बाबा जी का पूजन करते हैं तो कुछ भयवश दूर से ही बाबा जी को प्रणाम कर लेते हैं।
इसलिए संत समाज से निवेदन है कि बाबा जी के जयंती पर कमसेकम उपरोक्त समाज को जरूर शामिल करें। बाबाजी के पूजा करने का सबको अधिकार है, न कि केवल सतनामी को। *यदि हम नेता, मंत्री व कुछ प्रभावशाली लोगो को आमंत्रित करते हैं तो उनके समाज के सभी लोगो को क्यों नही? मनखे मनखे एक समान*

ऐसे बुद्धिस्टों व क्रिश्च्यानो को जो सतनामी समाज त्याग दिए हों, उन्हें सतनामी समाज के कार्यक्रम के दौरान माइक न दिया जावे। वे सतनामियों को भड़काकर धर्मपरिवर्तन करा सकते हैं या दीगर समाज से लड़ा सकते हैं।


हुलेश्वर जोशी सतनामी
कार्यकारिणी सदस्य
सतनामी एवम सतनाम धर्म 
विकास परिषद्, रायपुर (छत्तीसगढ़)


9406003006

बुधवार, 5 जुलाई 2017

5:22 pm

छत्तीसगढ़ राज्य में सतनाम धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थल और धाम

सतनामी एवं सतनाम धर्म के अनुयायितों के लिए यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि छत्तीसगढ़ राज्य में सतनाम धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थल और धाम कहाँ-२ है।  

इसी उद्देश्य से हम सतनामी समाज को सतनाम धर्म के प्रमुख तीर्थस्थल एवं धाम के नाम बता रहे हैं। 

1. गिरौदपुरी धाम, जिला -बलौदाबाजार-भाटापारा
2. भंडारपुरी धाम, जिला -रायपुर
3. तेलासीपुरी धाम, जिला -बलौदाबाजार -भाटापारा
4. खपरीपुरी धाम, जिला -रायपुर
5. खड़ुवापुरी अगम धाम, जिला -बलौदाबाजार - भाटापारा
6. चटुवापुरी धाम, जिला -बेमेतरा
7. चक्रवाय धाम, जिला -बेमेतरा
8. कुंआ बोड़सरा, जिला -बिलासपुर
9. भिलाई सेक्टर-६, सतनाम भवन ,जिला-दुर्ग
10. लालपुर धाम, जिला -मुंगेली
11. उमरियापुरीधाम, जिला -बिलासपुर
12. पचरी धाम, जिला -जांजगीर-चांपा
13. पटाढ़ीपुरी धाम, जिला -कोरबा
14. अमरटापू मोतिमपुर, जिला -मुंगेली
15. कुटेलाधाम, जिला -बिलासपुर
16. औँराबाँधा, जिला-मुंगेली
17. जोगीकुआँ बैकुंठ धाम, जिला- रायपुर
18. बाराडेरा धाम, जिला- रायपुर
19. संतोष पुरी धाम, सिलयारी बाहरा, जिला गरियाबंद 

सतनामी संतों, माताओ और बहनों से आग्रह है कि यदि किसी भी तीर्थ स्थल / धाम के नाम छूट गए हों तो कमेंट बॉक्स में उनके नाम अवश्य बताएं, ताकि निकट भविष्य में जोड़ा जा सके। 

सोमवार, 3 जुलाई 2017

4:46 pm

सतनाम धर्म

सतनाम धर्म समस्त धर्मों का मूल है इसी से समस्त धर्मों की उत्पत्ति हुई है। धीरे-धीरे जब मनुष्य का विकास होता गया तब मनुष्यों के विचारों में व्यापकता आई, विविधता आई और अपने अपने स्वार्थ पनपते गये जिससे लोग सत्य के मार्ग से भटकते गये और लोग धर्मभ्रष्ट होने लगे तो विभिन्न विद्वानों द्वारा अपने अपने प्रभुत्वसम्पन्न गुणों के माध्यम से भांति भांति के धर्म का सृजन किया गया, इसप्रकार से समग्र विश्व में अनेकोनेक धर्म की स्थापना होती गई।

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